शुक्रवार को डॉलर के मुकाबले रुपये के कमजोर होने का असर भारतीय शेयर बाजार पर भी दिखा और गिरावट के साथ कारोबार की शुरुआत हुई. सेंसेक्स करीब 30 अंक नीचे गिरकर 35960 पर खुला. वहीं निफ्टी मामूली गिरावट लेकर 10,784 पर खुला. शुरुआती कारोबार के दौरान सेंसेक्स भारती एयरटेल, एचडीएफसी बैंक, इंफोसिस में तेजी है. वहीं, निफ्टी पर आईटी को छोड़कर सभी सेक्टोरल इंडेक्स गिरावट में हैं.
इस सप्ताह ऐसी रही चाल
इससे पहले अमेरिकी और यूरोपीय मार्केट में चल रही तेजी का असर गुरुवार को भी भारतीय बाजारों पर दिखा. सेंसेक्स 150.57 अंकों की बढ़त के साथ 35,929.64 पर और निफ्टी 53.95 अंकों की तेजी के साथ 10,791.55 पर बंद हुआ. वहीं बुधवार को प्रमुख इंडेक्स सेंसेक्स करीब 629 अंक की मजबूती के साथ 35779 के स्तर पर बंद हुआ तो वहीं निफ्टी 188 अंक उछलकर 10737 के स्तर पर रहा. जबकि मंगलवार को सेंसेक्स 190 अंकों की बढ़त के साथ 35,150 के स्तर पर बंद हुआ तो निफ्टी करीब 61 अंक बढ़कर 10,550 के स्तर पर आ गया. हालांकि सोमवार को सेंसेक्स 713.53 अंक यानी 2 फीसदी टूटकर 34,959.72 के स्तर पर बंद हुआ था जबकि निफ्टी 205.25 अंक यानी 1.92 फीसदी टूटकर क्रमशः 10,488.45 के स्तर पर रहा.
यह पहली बार नहीं है जब किसानों की कर्ज माफी को लेकर विरोध हुआ है.इससे पहले जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में प्रचार के दौरान प्रदेश के किसानों का कर्ज माफ करने का वादा किया था तब भी विरोध हुआ था. तब देश के सबसे बड़े बैंक एसबीआई की तत्कालिन चेयरपर्सन अरुंधति भट्टाचार्य ने भी किसान कर्ज माफ किए जाने पर आपत्ति जताई थी. उन्होंने अनुशासन बिगड़ने की बात कही थी. उन्होंने कहा था कि कर्ज लेने वाले कर्ज चुकाने के बजाय अगले चुनाव का इंतजार करेंगे. किसान कर्ज माफी का विरोध करने वालों में रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर रहे एस.एस. मूंदड़ा भी शामिल थे.
इन राज्यों में किसानों को मिल चुकी है राहत
उत्तर प्रदेश में योगी सरकार ने बीते साल राज्य के 86 लाख किसानों का करीब 30,729 करोड़ का कर्ज माफ किया था. राज्य के 7 लाख किसानों का जो लोन एनपीए बन गया है, वो भी माफ कर दिया गया था. वहीं महाराष्ट्र की बीजेपी सरकार ने 35 लाख किसानों का 1.5 लाख रुपये तक का लोन माफ किया था. 9 लाख किसानों को लोन के वन टाइम सेटेलमेंट का फायदा दिया गया. जबकि पंजाब में कांग्रेस सरकार ने 5 एकड़ तक की खेती की जमीन वाले किसानों को 2 लाख रुपये तक की कर्जमाफी की. कर्नाटक के सहकारी बैंक से लिए गए हर किसान का 50,000 रुपये तक का कर्ज माफ किया गया.
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