Tuesday, July 16, 2019

यूपी में लव संकटः राधा-कृष्ण की ब्रजभूमि में दम तोड़ती मोहब्बतें

11 जून. नयागांव, एटा: आम के पेड़ से लटकते मिले सत्यप्रकाश यादव और सपना यादव (बदला हुआ नाम)

24 जून, गणेशपुर, मैनपुरी: अमन यादव और रेखा यादव (बदला हुआ नाम) के तेज़ाब से जले शव झाड़ी में मिले

27 जून खैरागढ़, आगरा: श्यामवीर तोमर और उसकी प्रेमिका नेहा कुशवाहा (बदला हुआ नाम) के शव खेत में पड़े मिले

01 जुलाई, सोरों, कासगंज, कुंवरपाल लोधी और उनकी प्रेमिका के रक्तरंजित शव मिले

प्रेमियों के ख़ून से लाल हुई ये वही ब्रजभूमि है जिस पर बना ताजमहल दुनियाभर के प्रेमियों का तीर्थ है.

इस ब्रज क्षेत्र के घर-घर में राधाकृष्ण की प्रेम लीलाओं के गीत गाए जाते हैं, लेकिन अब यहां प्रेमियों के हिस्से मौत लिखने की कहानियां सामने आ रही है.

मानों घरों के अंदर एक अनदेखा युद्ध चल रहा हो जिसमें एक ओर जवानी की दहलीज़ पर खड़े युवक-युवतियां हैं और दूसरी ओर उनके अपने ही परिजन.

हाल के दिनों में आगरा और आसपास के ज़िलों से सम्मान के नाम पर प्रेमियों की हत्या के कई मामले सामने आए हैं.

मैनपुरी के वरिष्ठ पत्रकार मनोज चतुर्वेदी कहते हैं, "कमज़ोर नाज़ुक उम्र के बच्चों की ज़िद और परिवारों के सम्मान के बीच टकराव में मासूम बच्चों की जानें जा रही हैं."

27 जून की सुबह हुई भी नहीं थी कि आगरा के ख़ैरागढ़ थानाक्षेत्र के नगला गोरऊ गांव में एक युवक और नाबालिग किशोरी की लाशें खेत में मिलने से तनाव फैल गया.

मारा गया युवक श्यामवीर तोमर था जिसके पास ही उसकी प्रेमिका नेहा कुशवाहा की लाश पड़ी थी.

सुबह चार बजे गांव के प्रधान ने श्यामवीर के घर आकर बताया, 'तुम्हारा बच्चा मरा पड़ा है.'

श्यामवीर की मां बताती हैं, 'मैं तड़प तड़प कर अपना सर पीटती रही लेकिन कोई मुझे मेरे बच्चे के पास नहीं ले गया.'

श्यामवीर का परिवार जाति से ठाकुर और पेशे से किसान है. वो पास के ही गांव की एक कुशवाहा जाति की नाबालिग लड़की से प्रेम करता था.

ठाकुर लड़के और कुशवाहा लड़की के प्रेम के बारे में गांव में चर्चा थी. एक बार पंचायत भी हुई थी और उसे दूसरी जाति की लड़की से ना मिलने के लिए समझाया गया था.

लेकिन उसका परिवार ये मानने को तैयार नहीं है कि वो अपने साथ मारी गई लड़की से प्रेम करता था.

शादी के सवाल पर उसकी मां कहती हैं, "ऐसे शादी कैसे कर देते, वो काछी हैं, हम ठाकुर हैं."

बात करते-करते अचानक उसकी मां विलाप करने लगती हैं. थरथराती आवाज़ में वो कहती हैं, "मेरा बच्चा प्यार में मारा गया."

आगरा पुलिस ने श्यामवीर और नेहा की मौत को सम्मान के नाम पर हत्या माना है.

श्यामवीर के भाई ओमवीर के मोबाइल में भाई की मौत से जुड़ी तस्वीरें और वीडियो हैं.

वो कहते हैं, "मेरे भाई को बहुत तड़पा-तड़पा कर मारा गया. जब मैं ये तस्वीरें देखता हूं तो ख़ून खौलने लगता है. बहुत रोना आता है. ऐसा लगता है कि या तो हत्यारों को मार दें या स्वयं मर जाएं."

इस मामले में नेहा के पिता, माता और बहन समेत कुल पांच लोगों को गिरफ़्तार कर लिया गया है. आगे की तफ़्तीश अभी जारी है.

आगरा के पुलिस अधीक्षक जोगिंदर सिंह के मुताबिक नेहा के पिता ने हत्या के आरोपों को स्वीकार किया है.

वहीं श्यामवीर के परिवार का कहना है कि नेहा के परिवार के साथ उनके घनिष्ठ संबंध थे. दोनों परिवारों के खेत भी आपस में लगे हुए थे और घर में भी आना-जाना था.

नेहा के गांव कच्छपुरा गोरऊ और श्यामवीर के गांव नगला गोरऊ के बीच बस कुछ खेतों का फ़ासला है.

इन्हीं खेतों में कभी-कभी श्यामवीर और नेहा की मुलाक़ातें हो जाया करती थीं.

पुलिस जांच में सामने आया है कि श्यामवीर देर रात नेहा से मिलने पहुंचा था. उसे नेहा के साथ देख आक्रोशित हुए परिजनों ने दोनों की हत्या कर दी.

नेहा के घर में अब सन्नाटा पसरा है. आधा परिवार गिरफ़्तार हैं और बाकी लोग फ़रार हैं.

यहां एक बूढ़ी औरत कहती हैं, "बहुत बुरा हुआ. ऐसा लग रहा है जैसे गांव उजड़ गया हो. कुछ अच्छा नहीं लग रहा है. भय फैल गया है."

ख़ामोशी और ख़ौफ़ में घिरे इस गांव में कोई बात करने को तैयार नहीं होता. दबी ज़बान में लोग ये ज़रूर कहते हैं कि जो हुआ बुरा है.

कुछ लोग एक सुर में कहते हैं, "हमारे बुज़ुर्ग और हमारे संस्कार ऐसे कामों की अनुमति नहीं देते."

श्यामवीर के गांव के एक बुज़ुर्ग कहते हैं, "अगर उसे पकड़ भी लिया था तो मार पीट लेते. हाथ-पैर तोड़ देते. पुलिस को दे देते. मुक़दमा कर देते. जान लेने की क्या ज़रूरत थी?"

एक अन्य युवक कहता है, "इस हत्या के बाद से भय फैल गया है. ये हत्याएं भय फैलाने के लिए की गई हैं."

क्या इस घटना को रोका जा सकता था? इस सवाल पर नगला गोरऊ के राजवीर सिंह कहते हैं, "अगर लड़की के परिजन चाहते तो इस घटना को रोका जा सकता था. पुलिस है, प्रशासन है. उन्हें सभी क़ानून अपने हाथ में नहीं लेने थे. प्रशासन को कुछ मौका दिया जाता तो वो सुलह करा देते, ज़रूरत होती तो कोर्ट मैरिज करा देते. अगर सबकी सहमति होती तो बच्चों का घर भी बस जाता."

वो घटना के पीछे सबसे बड़ी वजह जाति को मानते हैं. वो कहते हैं, "जाति के कारण दोनों की शादी तो नहीं हो पाती लेकिन जाति से हमें इतनी परेशानी नहीं थी जितनी जान जाने से है. इस हत्याकांड ने गांव की शांति ख़त्म कर दी है. दो बेग़ुनाह बच्चों की जान गई है."

राजवीर कहते हैं, "इस घटना से हमारा परिवार बदनाम हुआ है, गांव बदनाम हुआ है, जाति बदनाम हुई है लेकिन सबसे बड़ी बात ये है कि दो बच्चों की जान गई है. ये जान नहीं जानी चाहिए थी चाहे कुछ भी करना पड़ता."

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