Tuesday, January 1, 2019

कमलनाथ बोले- विकास का अहसास काम से हो, विज्ञापन से नहीं

नए साल पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने 'आजतक' से विस्तृत बात की और प्रदेश में विकास और अपने काम के बारे में बताया. मुख्यमंत्री ने आजतक संवाददाता से कहा कि मध्य प्रदेश का भविष्य सुरक्षित रहे, इस पर उनकी सरकार का पूरा जोर रहेगा. उन्होंने यह भी बताया कि अब वे दिन गए जब मंत्री, विधायक कार्यों की घोषणा करते थे क्योंकि अब यह जिम्मेदारी अधिकारी और विभागों की होगी.

'आजतक' ने कमलनाथ से पूछा कि नया साल मध्य प्रदेश के लिए क्या नई सौगात लेकर आएगा? इसके जवाब में उन्होंने कहा, 'मैं कोई घोषणा करना नहीं चाहता. सबसे बड़ी सौगात होगी कि लोगों को अहसास हो कि ऐसा सत्ता परिवर्तन हुआ है कि मध्य प्रदेश का भविष्य सुरक्षित रहे. मैं यही चाहता हूं कि लोगों को यह अहसास काम से हो, विज्ञापन से नहीं. प्रदेश के लोगों को काम दिखे. यही मेरी सबसे बड़ी सौगात होगी. आगे और भी योजनाएं आएंगी, नीतियां आएंगी और परिवर्तन आएगा.'

उनसे अगला सवाल यह पूछा गया कि मध्य प्रदेश में ऐसा पहली बार हुआ है कि घोषणाएं अब मंत्री नहीं कलेक्टर करेंगे. ये सोच आपके अंदर कैसे आई? इस पर मुख्यमंत्री ने कहा, 'अंत में कार्यों का क्रियान्वयन अधिकारी करते हैं, विभाग करते हैं. विभाग के ऊपर यह जिम्मेदारी होनी चाहिए कि जो घोषणा कर रहे हैं, उसको निभाएं. इसका क्रियान्वयन हो. यह सब कुछ देखकर विभाग घोषणा करें कि बजट क्या है. इसकी पूरी रिपोर्ट उन्होंने बनाई है तो ये पूरी जिम्मेदारी उनकी है. अगर मैं घोषणा करता हूं तो जिम्मेदारी मेरी होती है. इस काम में कई प्रकार की अड़चनें आती हैं और कार्यों की पूर्ति नहीं होती.'

गौरतलब है कि पिछले 15 साल से मध्य प्रदेश में बीजेपी का राज था और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान थे. इतने वर्षों के बाद कांग्रेस वहां दोबारा सत्ता में आई है और मुख्यमंत्री कमलनाथ बनाए गए हैं. उन्होंने पद की शपथ लेते ही चुनावी घोषणा पत्र में दर्ज कई वायदों में एक किसानों की कर्ज माफी को लागू किया और कई किसानों को इससे राहत दी. उनकी आगे भी कई योजनाएं हैं जिस पर सरकार धीरे-धीरे अमल कर रही है. मंगलवार को साल के पहले दिन कई आईएएस और आईपीएस समेत 120 अधिकारियों को प्रमोशन दिया गया.

चुनावी वादे: बीते 4 साल के दौरान देश में चुनावी वादों के अच्छे दिनों की दरकार रही है. इन अच्छे दिनों के लिए देश में उत्पाद और सेवाओं की कम कीमत के साथ-साथ आम आदमी के लिए मूलभूत सुविधाओं पर जोर रहा है. बेहतर सड़क, पर्याप्त बिजली, मजबूत और सुरक्षित जन-यातायात, स्वास्थ सुविधा, प्रभावी शिक्षा व्यवस्था चुनावी वादों के जरिए सरकार के दायित्व में शामिल है. इन वादों को पूरा करने के लिए बेहद जरूरी है कि केन्द्र सरकार के राजस्व में इजाफा होता रहे और वह तभी संभव है जब देश में रोजगार के बड़े अवसर पैदा हों. इनके अलावा आगामी चुनावों से पहले देश की शीर्ष राजनीतिक दल लोकलुभावन वादों की बारिश कर रहे हैं जिनका महज नकारात्मक असर देश के विकास की गाथा पर पड़ेगा.

ये हैं आर्थिक आंकड़े जिनका 2019 चुनावों से पहले सरकार के पक्ष में होना जरूरी है 

वैश्विक संकट: भारत में तेज विकास दर ऐसी स्थिति में है जब वैश्विक अर्थव्यवस्था सिकुड़न के दौर में है. दुनिया की ज्यादातर बड़ी अर्थव्यवस्थाएं गंभीर चुनौतियों से घिरी है. अमेरिका और चीन के बीच शुरू हुए ट्रेड वॉर का असर दोनों अर्थव्यवस्थाओं के साथ-साथ यूरोप और एशिया की अधिकांश अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ रहा है. 2019 के दौरान ट्रेड वॉर और गंभीर चुनौती खड़ा कर सकता है जिसका खामियाजा भारत समेत कई एशियाई देशों को भुगतना पड़ेगा. इसके अलावा वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमत में उतार-चढ़ाव की स्थिति बनी हुई है. जहां 2018 में कच्चे तेल की कीमत में एक बार फिर इजाफा शुरू हुआ वहीं कच्चे तेल के उत्पादक खाड़ी देश 2014 से 2017 तक कमजोर कीमत के चलते कड़ी चुनौतियों में घिरे हैं. लिहाजा, 2019 के दौरान भारत के विकास की कहानी के लिए बेहद जरूरी है कि कच्चा तेल सामान्य दर पर उपलब्ध रहे जिससे सरकार के राजस्व पर अतिरिक्त बोझ न पड़े.

No comments:

Post a Comment