Thursday, January 24, 2019

ठाकरे: स्पेशल स्क्रीनिंग छोड़ चले गए डायरेक्टर अभिजीत पानसे, क्या ये है वजह?

नवाजुद्दीन सिद्दीकी की फिल्म 'ठाकरे' शुक्रवार को रिलीज हो गई है. फिल्म का निर्देशन अभिजीत पानसे ने किया है. फिल्म शिवसेना संस्थापक बाल ठाकरे की बायोपिक है. गुरुवार शाम को शिवसेना नेता संजय राउत ने उद्धव ठाकरे और करीबी लोगों के लिए स्पेशल स्क्रीनिंग रखी. इसमें डायरेक्टर अभिजीत को भी बुलाया गया था. लेकिन फिल्म के निर्देशक मूवी देखे बिना ही स्क्रीनिंग को छोड़कर चले गए. 

कहा जा रहा है कि अभिजीत पानसे किसी वजह से स्क्रीनिंग में देर से पहुंचे थे. ऐसे में उनका इंतजार नहीं किया गया और उनके बिना ही शो शुरू कर दिया गया. अभिजीत इससे थोड़े से डिस्टर्ब लग रहे थे. वो स्क्रीनिंग में भी देरी से पहुंचे. ऐसी भी खबरें हैं कि संजय राउत और उनके बीच किसी चीज पर बहस भी हुई.

इतना ही नहीं अभिजीत को सिनेमाघर में स्क्रीन के पास की सीट दी गई और जब डायरेक्टर ने बैठने के लिए अच्छी सीट मांगी तो उन्हें सीट नहीं मिली. एक मराठी चैनल ने संजय राउत से इस घटना के बारे में पूछा भी तो उन्होंने जवाब दिया, ''अभिजीत को कुछ काम था, जिसके कारण वो चले गए.''

बता दें कि ठाकरे का फर्स्ट शो मुंबई स्थित आईमैक्स वडाला में सुबह 4.15 बजे रखा गया. कहा जा रहा है कि भारतीय सिनेमा के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है. वहीं आसपास आईमैक्स वडाला के बाहर सुबह फैंस ने जमकर सेलिब्रेशन किया. थियेटर के बाहर ढोल-ताशे बजाए. हॉल को फूलों से सजाया गया. शिवसेना के कार्यकर्ता और नेता हॉल के बाहर मौजूद दिखे.

26 जनवरी को देशभर में 69वां गणतंत्र दिवस मनाया जाएगा. इसी दिन हमारे देश का संविधान लागू किया गया था. लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि 26 जनवरी को मनाए जाने वाले गणतंत्र दिवस को 'स्वतंत्रता दिवस' के रूप में मनाया जाता था. आइए जानते हैं क्या है पूरी कहानी...

भारत को आजादी भले ही 15 अगस्त 1947 को मिली लेकिन 26 जनवरी 1950 को भारत पूर्ण गणराज्य बना. इसी दिन को पूरा भारत गणतंत्र दिवस के रूप में मनाता है. संविधान 26 नवंबर 1949 में पूरी तरह तैयार हो चुका था लेकिन दो महीने इंतजार करने के बाद इसे 26 जनवरी 1950 को लागू किया था.

संविधान लागू करने के लिए 26 जनवरी की तारीख को इसलिए चुना गया क्योंकि साल 1930 में 26 जनवरी को देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व में इंडियन नेशनल कांग्रेस ने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ 'पूर्ण स्वराज' का ऐलान किया था.

भारत के गणतंत्र की यात्रा कई सालों पुरानी है, जो 1930 में शुरू हुई थी. जिसके बाद सन 1930 से 15 अगस्त 1947 तक पूर्ण स्वराज दिवस यानी 26 जनवरी को ही स्वतत्रंता दिवस मनाया जाता था.

जब गणतांत्रिक राष्ट्र का हुआ ऐलान

गणतंत्र राष्‍ट्र के बारे में 31 दिसंबर 1929 को रात में भारतीय राष्‍ट्रीय कांग्रेस के लाहौर सत्र में विचार किया गया था. जिसके लिए एक बैठक आयोजित की गई थी. यह बैठक पंडित जवाहरलाल नेहरू की अध्‍यक्षता में आयोजि‍त की गई थी.

इसी बैठक में हिस्सा लेने वाले लोगों ने पहले 26 जनवरी को "स्‍वतंत्रता दिवस" के रूप में मनाने की शपथ ली थी, जिससे कि ब्रिटिश राज से पूर्ण स्‍वतंत्रता के सपने को साकार किया जा सके.

इसके बाद लाहौर सत्र में नागरिक अवज्ञा आंदोलन की रूपरेखा तैयार हुई और यह फैसला लिया गया कि 26 जनवरी 1930 को 'पूर्ण स्‍वराज दिवस' के रूप में मनाया जाएगा. वहीं इसी दिन देश का झंडा फहराया गया और 26 जनवरी को स्वतंत्रता दिवस मनाने की शपथ ली गई थी. इसके लिए सभी क्रांतिकारियों और पार्टियों ने एकजुटता दिखाई थी.

डॉ. राजेन्‍द्र प्रसाद ने की 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस मनाने की घोषणा

जहां भारत देश अंग्रेजों की गुलामी से 15 अगस्त 1947 को आजाद हो गया था. लेकिन जब 26 जनवरी 1950 को भारतीय संविधान अस्तित्व में आया तब भारत को अपनी ताकत का अहसास हुआ. देश का संविधान 2 साल, 11 महीने और 17 दिन में तैयार किया गया था. ये कहना गलत नहीं होगा कि सही मायने में भारत को आजादी 26 जनवरी को ही मिली थी. जिसके बाद देश के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने 26 जनवरी को देशभर में गणतंत्र दिवस मनाने की घोषणा की.

No comments:

Post a Comment